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देश को अब चाहिए एक नया और सशक्त दृष्टिकोण



कांग्रेस शासित यूपीए पिछले 10 साल से भारत पर राज कर रही है।बुधवार 26 मार्च को कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी किया जिसमें देश के विकास के लिए नए विकल्पों का अभाव है।गौर करने वाली बात ये है कि ये पार्टी अपने पिछले वादों को भी पूरा करने में विफल रही, जो 2009 में लोगों से किये थे तो अब 2014 के लिए किए गए वादे फीके पड़ चुके हैं।


2014 में किए गए कुछ वादे तो वही हैं जो 2009 में विफल रहे थे जैसे कि महिलाओं की संसद में 33% की भागीदारी का बड़ा वादा, जो कांग्रेस ने लोगों को पूरे यकीन से 2014 तक पूरा करने का किया था. या फिर एक और वादा जिसमें कांग्रेस ने कहा था कि वो एक प्रशासनिक सुधार संगठन बनाएगी। सरकार ने ये भी कहा था कि उनके हिसाब से अगर 5 साल पहले ये लागू होता तो वो भारत के पुराने और विघ्नहीन प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह बदल देता। लेकिन अब इसके लिए कांग्रेस सरकार पर भरोसा कैसे किया जा सकता है? और ख़ासकर की तब जब हम ये बात जानते हैं कि ये सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में वो वादे पूरे करने में विफल रही है। इन वादों के अनुसार कुछ और महत्तवपूर्ण आयोग को लागू करने की बात कही गई थी जो यूपीए1 के दौरान बनाए गए थे। इसमें राष्ट्रीय सूचना आयोग भी शामिल है।


चलिए पुरानी नीतियों को छोड़कर कांग्रेस द्वारा कही गई नई नीतियों की बात करते हैं। अब अपनी अधिकारों की नीति के अनुसार कांग्रेस ने अब फिर से बात की है स्वास्थ्य अधिकार की, आवास निर्माण अधिकार की, बहुचर्चित शिक्षा के अधिकार की और ख़ास तौर पर खाद्य अधिकार की। अब स्वास्थ्य का मूल अधिकार देने में कोई दो राय नहीं है। हां जो बात विवादपूर्ण है वो है इस पॉलिसी को पूरा करने के लिए तैयार किया गया ढांचा। और इसके लिए कांग्रेस पार्टी का साफ़ जवाब है ‘अधिक ख़र्च’। इस स्वास्थ्य अधिकार का मूल तर्क है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी ख़र्च जीडीपी के 3% तक बढ़ाया जाए।लेकिन सरकार ने इस बात का ज़िक्र ही नहीं किया है कि ये पैसा कैसा ख़र्च होना है। देखा जाए तो इस समस्या का समाधान ज़्यादा पैसा ख़र्च करना बिलकुल नहीं है। बल्कि पैसा ज्यादा ख़र्च होगा तो राष्ट्रीय संपत्ती को नुकसान ही पहुंचेगा। वहीं आवास निर्माण के अधिकार में भी कांग्रेस सरकार का ऐसे ही पैसा खर्च करने का विचार है जिसमें राजीव गांधी आवास याजना और इंदिरा गांधी आवास योजना शामिल हैं।ये बहुत दुख की बात है कि कांग्रेस पार्टी ने ज़रूरी क़दम नहीं उठाए जिस्से इस योजना को बढ़ावा मिल सकता था। जैसे कि सरकार फ़्लोर स्पेस इंडेक्स में छूट दे सकती थी या फिर खाली पड़ी सरकारी ज़मीनों पर आवास का निर्माण करवाया जा सकता था। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। 


इस घोषणा पत्र में 1 अरब डॉलर बुनियादी ढांचे पर खर्च करने की बात कही है, जिसमें 1 करोड़ की आबादी वाले क्षेत्र को स्पीड रेल से जोड़ने का प्रावधान भी है। अब ज़ाहिर सी बात है कि सवाल ये उठता है कि इतना पैसा आएगा कहां से आएगा जबकि देश का राजकोषिय घाटा ख़तरे में है।इस घोषणा पत्र में कमी है एक ऐसे सशक्त एजेंडा की जो आर्थिक सुधार को सरलता से लागू करे जिसकी मदद से आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके। उदाहरण के लिए बीमा, पेंशन, बैंकिंग, आदि का इसमें ज़िक्र ही नहीं है जो एक वित्तीय समावेश और सस्ता कर्जा दिलाने में मददगार होगा। इसमें श्रम क़ानून की बात भी नहीं है जो उत्पादन के क्षेत्र में नए रोज़गार के अवसर ला सकता है। कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से थक-हार चुकी है और नए विकल्प सामने रखने में असफल है।

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